2014

राष्ट्रीय अध्यक्ष, भाजपा

Amit Shah's Introduction
  • अमित भाई की कार्यक्षमता और पार्टी की विचारधारा के प्रति प्रतिबद्धता को पहचानते हुए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने उन्हे जुलाई 2014 में भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया।
  • जिस समय अमित भाई ने पार्टी की कमान संभाली उनकी उम्र सिर्फ 49 वर्ष थी जो कि अभी तक के भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों में सबसे कम है। उनकी कम उम्र से उनके अनुभवों और क्षमताओं को आंकना गलत होगा क्योंकि उन्होंने अल्प आयु से ही RSS के स्वयंसेवक के रूप में जन-सेवा और राष्ट्र निर्माण में वृहद भागीदारी की थी।
  • तीस वर्षो के बाद केन्द्र में पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने के बावजूद भाजपा से राजनैतिक और वैचारिक मतभेद रखने वाला अभिजान्य वर्ग भौगोलिक रूप से पार्टी को अभी भी राष्ट्रीय दल मानने को तैयार नहीं था। अमित भाई ने इस चुनौती को स्वीकार करते हुय राष्ट्रीय स्तर पर सदस्यता अभियान चला कर भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनाने का बीड़ा उठा लिया। कहते है जब मन सुदृढ़ और विचार अडिग हो तो कुछ भी असंभव नहीं होता। कठिन परिश्रम, पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं के सहयोग और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता का लाभ लेते हुए 11 करोड़ से भी अधिक सदस्यों के साथ भाजपा को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बना दिया। इस दौरान अमित भाई के कठिन परिश्रम का अंदाजा इस तथ्य से लगता है कि इतने कम समय में देश के सभी राज्यों का दौरा करने वाले भाजपा के पहले अध्यक्ष बने। उल्लेखनीय है कि सदस्यता अभियान के दौरान अमित भाई ने 160634 कि.मी. से भी अधिक दूरी की यात्रा की जो कि प्रतिदिन 541 कि.मी. से भी अधिक है।
  • भाजपा को दुनिया की सबसे बडी़ पार्टी बनाने के बाद अपने “सशक्त भाजपा’’ के अभियान को और मजबूती देते हुए अमित भाई ने राष्ट्रीय स्तर पर “महा-जनसम्पर्क अभियान” शुरू किया। इस जनसम्पर्क अभियान के अंतर्गत भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता विभिन्न कायक्रमो और व्यक्ति से व्यक्ति सम्पर्क के द्वारा नये बने सदस्यो को पार्टी की मुख्यधारा से जोडने का काम किया गया।
Amit Shah's Introduction
  • “सशक्त भाजपा’’ के अभियान में अपनी व्यस्तता के बावजूद अमित भाई ने अपने कार्यकाल के प्रथम वर्ष में हुए 5 विधानसभा चुनावों में भी पार्टी को भारी सफलता दिलवाई। प्रधानमन्त्री श्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता और अपनी अभेद रणनीती के प्रभावी सामंजस्य का इस्तेमाल करते हुए, अमित भाई ने पांच में से तीन राज्यों में भाजपा का मुख्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर में उप-मुख्यमंत्री बनवाया। हरियाणा में जहाँ भाजपा को पूर्व में कभी भी 10 से ज्यादा सीटें नही मिली थी, वहाँ पार्टी की पूर्ण बहुमत की सरकार बनी। गठबन्धन सरकारों की वजह से विकास में पिछड़ते झारखंड में भी भाजपा ने एक स्थाई सरकार दी। महाराष्ट्र में लम्बे समय तक गठबंधन पर अश्रित रहने वाली भाजपा को अमित भाई नें अकेले चुनाव लडवाने की हिम्मत दिखाई और बहुमत के बहुत नजदीक पहुच कर अपना मुख्यमंत्री बनवाया। अल्पसंख्यक बाहुल्य जम्मू-कश्मीर में अमित भाई ने आलोचनाओं से डरे बिना विपरीत विचारधारा वाली पी.डी.पी के साथ गठबंधन सरकार बनवा कर भाजपा की राष्ट्रीयता और कश्मीर के प्रति अपनी कटिबद्धता का परिचय दिया। पार्टी विस्तार और चार राज्यों के चुनावों में अमित भाई की व्यस्तता के चलते वह दिल्ली चुनाव में वांछित समय नहीं दे पाए, जिसके चलते भाजपा को यहाँ बुरी हार का सामना करना पडा। परन्तु संघर्ष के आदी अमित भाई का आत्म विश्वास नही हिला और वह भविष्य की चुनोतियों का सामना करने में फिर से रम गये।
Amit Shah's Introduction